Astrology

astrologyप्रत्येक पदार्थ में अन्तर्निहित सूक्ष्म कणों का विश्लेषण करने पर उनकी सुक्ष्म रचना का पता चलता है | उस सूक्ष्म रचना का मूलाधार परमाणु है एवं उसकी संरचना सौर जगत से मिलती जुलती है | मनुष्य का शरीर भी असंख्य परमाणु कणों का सम्मलित स्वरूप है | सौरमंडल में स्थित ग्रहों से इस शरीर का परस्पर सम्बन्ध ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश का प्रभाव मानव शरीर पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है |
मनुष्य एक उच्चस्तरीय प्राणी है | उसके कर्मों, भावों, संकल्पों के माध्यम से उनकी स्थिति में परिवर्तन होता रहता है | जीवन में होने वाले इन परिवर्तनों के लिए ब्रह्मण्ड में स्थित उर्जा के विभिन्न स्तर जिम्मेवार हैं उर्जा के स्तरों को ज्योतिष के विभिन्न विद्वानों ने प्रतिकात्मक संकेतों में वर्गीकृत किया है | नवग्रह, बारह राशियों, सत्ताईस नक्षत्र इस क्रमिक वर्गीकरण का रूप हैं | ज्योतिष शास्त्र द्वारा मनुष्य जीवन के दृष्य, अदृष्य आयामों का पता कर विभिन्न प्रकार के निदानों द्वारा उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं | मानवीय जीवन के दोषों को दूर कर संपूर्ण पारिवारिक, सामाजिक स्वास्थ्य का वरदान प्राप्त कर सकतें हैं |
मनुष्य का जन्म समय उसे विशेष रूप से प्रभावित करता है | प्रत्येक क्षण में उर्जा किसी विशेष बिंदु पर किसी विशेष परिमाण में मिलती है, उर्जा के उस स्तर का प्रभाव मानव जीवन पर आजीवन रहता है | जन्म समय में बना ऊर्जा चक्र (जन्म कुंडली) विगत किये गये कर्मों और संस्कारों का आइना होती है और इसी को आधार बना कर ज्योतिष में निदानों द्वारा उर्जा चक्रों के प्रभावों में बदलाव लाया जा सकता है |
किन परिस्थियों में हम क्या करें यानि क्या उपाय कर मनुष्य अपने जीवन में विशेष सुयोगों को ला सकता है कुयोगों को कम अथवा निरस्त कर सकता है |
इस विषय को लेकर हमने ज्योतिष के विभिन्न माध्यमों के द्वारा समस्याओं के निदान तक पहुँचने का प्रयास किया जिसमे हमने ज्योतिष शास्त्र (फलित), सामुद्रिकशास्त्र, तांत्रिक, मांत्रिक एवं यांत्रिक तकनीको का सम्मलित प्रयोग ऊर्जा चक्र (जन्मकुंडली) के दोषों के निवारण में किया है | ये विधियाँ काफी असरदार सिद्ध हुई हैं | दुःख-दुर्भाग्य, दोष -दैन्य, पीड़ा-पतन, विकृति-विरोध, आदि दोषों के निदान में ये तकनीक वरदान के सामान हैं |